Tuesday, September 9, 2008
निजता
गर्मी के भीषण दिनों में , जीवन से निराश जहाँ भी देखता था वहां भ्रम के अलावा कुछ नही दिखाई
देता था । असफलता , ग्लानि, कटुता का भाव लिए जीवन जी रहा हूँ । सूरज तो आसमान में चमक रहा था , लेकिन उसकी किरणे मुझ तक नहीं पहुँच रहीं थी ।
यह जीवन -गाथा से अधिक मेरा जीवन दर्शन है , यह बाहरी संसार से अधिक मेरे भीतरी संसार की गाथा है । मैं क्या सोचता हूँ , जीवन के बारे में , लोगों के बारे में , संसार के बारे में , दोस्ती , रिश्तों , प्रेम के बारे में । यह नितांत मेरे व्यक्तिगत विचार है । ऐसा नहीं है की इस प्रकार के विचार प्रथम बार मेरे मन में ही आयें । लेकिन मेरे जीवन मे तो यह प्रथम ही है ।
shishir
